भारत देश के प्रशस्त इतिहास मे अनेक घटनाएं घटीं, और इन अनेक घट्नाओं ने भारत देश पर अनेक प्रकार कि वह्नि बर्सायिं। किसि विदेशी आक्रमण्कारी ने याहान से मूर्तियां चुराईं, तो किसि ने याहान के मन्दिर तोडे और ग्यान केन्द्र और पुस्तकल्यों को हानि पहुंचाई। परन्तु, जिस प्रकार दृगों को मून्द लेने से सुर्य का प्रकश नष्ट नहिं होता, उस ही प्रकार भार्तिय संस्क्रिती और सभ्यता पर अनगिनत प्रहारों के पश्चात भी हमारा अस्तित्व जीवित है और तीव्र्ता से प्रकशित हो रहा है। यह सब इतिहास के गुरुयों और महान पुरुषों के बिना असम्भव होता। इस प्रथम लेख के माध्य्म से मै उन सभी गुरुयों और महान पुरुषों का धन्य्वाद करना चाहता हूं और उन का आशिर्वाद लेना चाहता हूं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, चक्रधारी भगवान श्री क्रिष्ण, आदि कवि श्री वाल्मिकि, श्री तुल्सिदास, सन्त कबीर, अंग्रेजों के विरुद्ध एक सांस खडे रहने वाले गान्धी जी, लोक्मान्य तिलक, वीर सावरकर, शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु, सर्दार वल्लभाई पटेल, अशफाक उल्ला खाँ, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद साह्ब, सुभाष चन्द्र बोस, अथ्वा दसीयों सौ स्वतन्त्रता ...