Skip to main content

मानव इतिहास के सब हि गुरुओं और आदर्निय पुरुषों को सादर प्रणाम।


भारत देश के प्रशस्त इतिहास मे अनेक घटनाएं घटीं, और इन अनेक घट्नाओं ने भारत देश पर अनेक प्रकार कि वह्नि बर्सायिं।

किसि विदेशी आक्रमण्कारी ने याहान से मूर्तियां चुराईं, तो किसि ने याहान के मन्दिर तोडे और ग्यान केन्द्र और पुस्तकल्यों को हानि पहुंचाई।

परन्तु, जिस प्रकार दृगों को मून्द लेने से सुर्य का प्रकश नष्ट नहिं होता, उस ही प्रकार भार्तिय संस्क्रिती और सभ्यता पर अनगिनत प्रहारों के पश्चात भी हमारा अस्तित्व जीवित है और तीव्र्ता से प्रकशित हो रहा है।

यह सब इतिहास के गुरुयों और महान पुरुषों के बिना असम्भव होता।

इस प्रथम लेख के माध्य्म से मै उन सभी गुरुयों और महान पुरुषों का धन्य्वाद करना चाहता हूं और उन का आशिर्वाद लेना चाहता हूं।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, चक्रधारी भगवान श्री क्रिष्ण, आदि कवि श्री वाल्मिकि, श्री तुल्सिदास, सन्त कबीर, अंग्रेजों के विरुद्ध एक सांस खडे रहने वाले गान्धी जी, लोक्मान्य तिलक, वीर सावरकर, शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु, सर्दार वल्लभाई पटेल, अशफाक उल्ला खाँ, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद साह्ब, सुभाष चन्द्र बोस, अथ्वा दसीयों सौ स्वतन्त्रता सेनानियों, और स्वतन्त्रता के पश्चात हुये सभी महान पुरुषों और भारत के अनादि काल से हुये सभी अव्तारों, पूजनिय राजायों, और हमारे पूर्वजों को मैं प्रणाम करता हूं, और साथ हि यह स्पष्ट करता हूं के इस स्थान पर पाठकों को राजनैतिक कुचक्रों और षड्यन्त्रों का पीड़ित नहिं होना पडेगा।

यह स्थान हम सभी देशवसियों को समर्पित है और हमारा है।

उद्देश्य यह है के हम अपनि संस्क्रिती को समझ सकें, पहचान सकें, अपने देश कि एक्ता का उत्साह मना सकें, और प्रत्येक नागरिक अपने व्यक्तिगत स्तर पर देश के खंडित हिस्सों को (जो जाति, धर्म, भाषा, राज्य, और इत्यदि कारणों से स्वं को शेष से या शेष को स्वं से भिन्न मानते हैं) एकत्रित करने हेतू अपना प्रण ले सके।

तो चलिये, देश के राष्ट्र गान का स्मरण करते हुये और देश के वीर पुरुषों के बलिदानों और गयान चिह्नों को याद रखते हुये आगे बढ़ते हैं।

Comments